वर्णमाला भाषा, वर्ण और संधि पर विस्तृत जानकारी:..2025-2026
वर्णमाला भाषा, वर्ण और संधि पर विस्तृत जानकारी:
1. भाषा और उसके प्रकार:
राज:
वह भाषा के माध्यम से मनुष्य द्वारा अपने विचारों के सामने प्रकट होता है और विद्वानों के भाव एवं विचार को सामने लाता है।
भाषा के प्रकार:
भाषा को विभिन्न आधारों पर स्थापित किया जा सकता है, जैसे:
उत्पत्ति का आधार:
प्राकृतिक: यह भाषाएँ स्वाभाविक रूप से विकसित होती हैं, जैसे हिंदी, अंग्रेजी, आदि।
कृत्रिम: यह भाषाएँ मानव द्वारा निर्मित हैं, जैसे समाजशास्त्र, कंप्यूटर विज्ञान भाषाएँ।
प्रयोग के आधार पर:
सांस्कृतिक: यहयह भाषाएं किसी विशेष संस्कृति या समुदाय से जुड़ी होती हैं, जैसे क्षेत्रीय भाषाएं.
आधिकारिक: यह भाषा किसी देश या संगठन की आधिकारिक भाषा होती है, जैसे हिंदी भारत की आधिकारिक भाषा है।
व्याकरण के आधार पर:
विशिष्ट भाषा: इस भाषा में वाक्य संरचना, शब्द क्रम और अन्य व्याकरणिक नियम होते हैं।
अविकसित भाषा: इस भाषा में वाक्य संरचना, शब्द क्रम और व्याकरणिक नियम कम होते हैं।
2. वर्णमाला और वर्ण के भेद:
वर्णमाला:
किसी भी भाषा की सभी वर्णमाला (वर्ण) का क्रमबद्ध सूची वर्णमाला कहलाती है। हिन्दी वर्णमाला में 53 अक्षर होते हैं।
वर्ण के भेद:
वर्णों के 3 भेद होते हैं -
1- स्वर - 11 ( मूल स्वर + 7 दीर्घ स्वर)
2-अयोगवाह - 2 (अनुस्वार और विसर्ग )
3-व्यंजन - 40 (33 मूल व्यंजन + 4 संयुक्त व्यंजन + 2 उच्छिप्त व्यंजन + 1विशिष्ट व्यंजन
स्वर वर्ण: जिन वर्णों का उच्चारण स्वतंत्र रूप से किया जाता है, उन्हें स्वर वर्ण कहा जाता है।
ह्रस्व स्वर: जिन स्वरों के उच्चारण में कम समय लगता है, जैसे अ, इ, उ।
दीर्घ स्वर: जिन स्वरों के उच्चारण में ह्रस्व स्वरों से अधिक समय लगता है, जैसे आ, ई, ऊ।
प्लुत स्वर: प्लुत स्वरों के उच्चारण में 3 या 3से अधिक मात्रा का समय लगता है। प्लुत स्वर: का चिह्न S होता है, जैसे 'ओSSS'।
व्यंजन वर्ण: जिन वर्णों के उच्चारण स्वरों की सहायता से किये जाते हैं, उन्हें व्यंजन वर्ण कहा जाता है।
स्पर्श व्यंजन: जो मुख के विभिन्न स्थानों को स्पर्श करके उच्चारित होते हैं। ये 25 होते है- क, ख, ग, घ, ङ, च, छ, ज, झ, ञ, ट, ठ, ड, ढ,
ण, त,थ, द, ध, न, प, फ, ब, भ, म.
अन्तःस्थ व्यंजन: जो वर्ण स्वरों और व्यंजनों के बीच में आते हैं, जैसे य, र, ल, व।
ऊष्म व्यंजन: जो वर्ण मुख में चित्रित होकर उच्चारित होते हैं, जैसे श, ष, स, ह।
3. संधि और उसका भेद:
संधि:
दो या दो से अधिक वर्णों के मिलने से जो परिवर्तन होता है, उसे संधि कहते हैं।
संधि के भेद:
संधि को तीन मुख्य प्रोटोटाइप में रखा जा सकता है:
स्वर संधि: दो स्वरों के मिलन से जो परिवर्तन होता है, उसे स्वर संधि कहते हैं।
स्वर संधि के भेद:
दीर्घ स्वर संधि: ह्रस्व या दीर्घ स्वर के बाद समान स्वर आए, तो दोनों मिलकर दीर्घ हो जाते हैं.
उदाहरण: अ + अ = आ, इ + इ = ई, उ + उ = ऊ.
गुण संधि: अ या आ के बाद इ, ई आए तो ए और उ, ऊ आए तो ओ बन जाते हैं.
उदाहरण: अ + इ = ए, अ + उ = ओ.
वृद्धि संधि: अ या आ के बाद ए, ऐ आए तो ऐ बन जाते हैं, अ या आ के बाद ओ, औ आए तो औ बन जाते हैं.
उदाहरण: अ + ए = ऐ, अ + ओ = औ.
यण संधि: इ, ई, उ, ऊ, ऋ के बाद कोई अन्य स्वर आने पर वे क्रमशः य, व, र, ल बन जाते हैं.
उदाहरण: इ + अ = या, उ + अ = वा.
अयादि संधि: ए, ऐ, ओ, औ के बाद कोई अन्य स्वर आने पर वे क्रमशः अय, आय, अव, आव बन जाते हैं.
उदाहरण: ए + अ = अय, ओ + अ = अव.
व्यंजन व्यंजन: व्यंजन व्यंजनों के मिलन से जो परिवर्तन होता है, उसे व्यंजन व्यंजन कहते हैं।
विसर्ग संधि: विसर्ग (:) के बाद किसी भी स्वर या व्यंजन वर्ण के आने से जो परिवर्तन होता है, उसे विसर्ग संधि कहते हैं
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